यंत्रों में सबसे अधिक चमत्कारिक और शीघ्र असर दिखाने वाला सर्वश्रेष्ठ यंत्र श्रीयंत्र माना जाता है। कलियुग में श्रीयंत्र कामधेनु के समान है। उपासना सिद्ध होने पर सभी प्रकार की श्री अर्थात् चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। इसलिए इसे श्रीयंत्र कहते हैं। वेदों के अनुसार श्रीयंत्र में 33 करोड़ देवताओं का वास है। वास्तुदोष […]
पूजा में यंत्रों का महत्त्व क्यों होता है?
विद्वानों का मानना है कि पूजा के स्थान पर देवी-देवताओं के यंत्र रख कर उनकी पूजा उपासना करने से अधिक उत्तम फल मिलता है, क्योंकि देवी-देवता यंत्र में स्वयं वास करते हैं। अतः मंत्रों की तरह ही यंत्र भी शीघ्र सिद्धि देने वाले होते हैं। यों भी कहा जा सकता है कि यंत्र, मंत्रों का […]
यज्ञ में मंत्रों का ऊंचे स्वर में उच्चारण क्यों?
कहा जाता है कि यज्ञ के जरिए देवता प्रकट होकर मनोवांछित वर देते हैं। वेद मंत्रों, यज्ञीय मंत्रों की शक्ति ऐसी होती है, जिसके द्वारा देवराज इंद्र सरीखे शक्तिशाली देवता को भी आने को विवश किया जा सकता है। यज्ञ में मंत्रों का विधिवत् उच्चारण एवं जाप, द्वारा आहुतियां देने से आकाश में जो अदृश्य […]
यज्ञ में आहुति के साथ स्वाहा क्यों बोलते हैं ?
मत्स्यपुराण में यज्ञ के संबंध में कहा गया है कि जिस कर्म विशेष में देवता, हवनीय द्रव्य, वेद मंत्र, ऋत्विक् एवं दक्षिणा-इन पांच उपादानों का संयोग हो, उसे यज्ञ कहा जाता है। परमार्थ प्रयोजनों के लिए किया गया सत्कर्म ही यज्ञ है। हमारे ऋषि-मुनियों ने यज् धातु से निष्पन्न यज्ञ शब्द के तीन अर्थ-देवपूजन, संगतिकरण […]
धार्मिक कार्यों में शंख क्यों बजाते है और शंख बजाने की परंपरा क्यों है?
पूजा-पाठ, उत्सव, हवन, विजयोत्सव, आगमन, विवाह, राज्याभिषेक आदि शुभ कार्यों में शंख बजाना शुभ और अनिवार्य माना जाता है। मंदिरों में सुबह और शाम के समय आरती में शंख बजाने का विधान है। शंखनाद के बिना पूजा-अर्चना अधूरी मानी जाती है। सभी धर्मों में शंखनाद को बड़ा ही पवित्र माना गया है। अथर्ववेद के चौथे […]
तिलक लगाने से क्या होता है और इसका प्रचलन क्यों है ?
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ललाट पर तिलक या टीका धारण करना एक आवश्यक कार्य है, क्योंकि यह हिंदू संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। कोई भी धार्मिक आयोजन या संस्कार बिना तिलक के पूर्ण नहीं माना जाता। जन्म से लेकर मृत्यु शय्या तक इसका प्रयोग किया जाता है। यों तो देवी-देवताओं, योगियों, संतों-महात्माओं के मस्तक […]
पीपल का पूजन क्यों किया जाता है ?
तैत्तिरीय संहिता में प्रकृति के सात पावन वृक्षों में पीपल की गणना है और ब्रह्मवैवर्तपुराण में पीपल की पवित्रता के संदर्भ में काफी उल्लेख मिलता है। पद्मपुराण के अनुसार पीपल का वृक्ष भगवान् विष्णु का रूप है। इसीलिए इसे धार्मिक क्षेत्र में श्रेष्ठ देव वृक्ष की पदवी मिली और इसका विधिवत पूजन आरंभ हुआ। अनेक […]
तुलसी का विशेष महत्त्व क्यों है ? Tulsi Ka Mahatva Kyon Hai ?
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार हर हिंदू घर के आंगन में कम-से-कम एक तुलसी का पौधा अवश्य होना चाहिए। कार्तिक मास में तुलसी का पौधा लगाने का बड़ा माहात्म्य माना गया है स्कंदपुराण में लिखा है कि इस मास में जो जितने तुलसी के पौधे लगाता है, वह उतने ही जन्मों के पापों से मुक्त हो […]
वृक्षों की पूजा – उपासना क्यों की जाती है ?
भारतीय संस्कृति में वृक्षों का विशेष महत्त्व है, क्योंकि वे हमारे जीवन के प्राण हैं। पुराणों तथा धर्म-ग्रंथों में पेड़-पौधों को बड़ा पवित्र और देवता के रूप में माना जाता है, इसलिए उनके साथ पारिवारिक संबंध बनाए जाते हैं। जब से वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है, […]
सत्संग और कथा प्रवचन सुनने का महत्त्व क्यों?
Satsang aur katha pravachan sunne se kya hota hai? हमारे देश का पौराणिक और धार्मिक कथा साहित्य बड़ा समृद्धिशाली है। ऋषि-मुनियों ने भारतीय ज्ञान, नीति, सत्य, प्रेम, न्याय, संयम, धर्म तथा उच्चकोटि के नैतिक सिद्धांतों को जनता तक पहुंचाने के लिए बड़े ही मनोवैज्ञानिक ढंग से अनेक प्रकार की धार्मिक कथाओं की रचना की है। […]
