वर-वधू को विवाह की रस्में पूर्ण हो जाने के पश्चात् अपने कर्तव्य धर्म का महत्त्व भली-भांति समझाने और उनका निष्ठा पूर्वक पालन कराने हेतु संकल्प के रूप में अलग-अलग प्रतिज्ञाएं कराई जाती हैं, जिनके पूरी होने पर स्वीकृति स्वरूप दोनों से ‘स्वीकार है’, कहलवाने की प्रथा है। विवाह संस्कार पद्धति के अनुसार, ये सब प्रतिज्ञाएं […]
शौच के समय जनेऊ कान पर लपेटना जरूरी क्यों हैं?
आम बोलचाल में यज्ञोपवीत को ही जनेऊ कहते हैं। मल-मूत्र त्याग के समय जनेऊ को कान पर लपेट लिया जाता है। कारण यह है कि हमारे शास्त्रों में इस विषय में विस्तृत ब्यौरा मिलता है। शांख्यायन के मतानुसार ब्राह्मण के दाहिने कान में आदित्य, वसु, रुद्र, वायु और अग्नि देवता का निवास होता है। पाराशर […]
गुरु का महत्त्व क्यों? Guru Ka Mahatva Kyon Hota Hai
आदि काल से हमारे समाज ने गुरु की महत्ता को एक स्वर से स्वीकारा है। ‘गुरु बिन ज्ञान न होहि’ का सत्य भारतीय समाज का मूलमंत्र रहा है। शिक्षा हो, जीवनदर्शन हो या धर्म संस्कार की बात हो, इनका ज्ञान बिना गुरु के नहीं मिलता। हमारे प्राचीन शास्त्रों में गुरु महिमा का वर्णन इस प्रकार […]
मां सरस्वती को ही ज्ञान की देवी क्यों माना जाता है?
मां सरस्वती विद्या, संगीत और बुद्धि की देवी मानी गई हैं। देवीपुराण में सरस्वती को सावित्री, गायत्री, सती, लक्ष्मी और अंबिका नाम से संबोधित किया गया है। प्राचीन ग्रंथों में इन्हें वाग्देवी, वाणी, शारदा, भारती, वीणापाणि, विद्याधरी, सर्वमंगला आदि नामों से अलंकृत किया गया है। यह संपूर्ण संशयों का उच्छेद करने वाली तथा बोधस्वरूपिणी हैं। […]
धर्म की आवश्यकता क्यों? Dharm Ki Avashyakta Kyon Hai
धर्म का विषय बड़ा गहन है। धर्म शब्द धू+मन् से बनता है। धृ का अर्थ जो है, जो विद्यमान है, जो स्थापित है, जो सुरक्षित है, जो नित्य सहायक है, जो आप धारण किया हुआ है और मन् का अर्थ है याद करना, मानना, मूल्यवान समझना, बड़ा मानना, प्रत्यक्ष करना और पूजा करना। हमारे वेद-पुराणों […]
मनुष्य जीवन दुर्लभ क्यों?
प्राचीन काल से हमारे ऋषि-मुनियों, विचारकों और मर्मज्ञों ने इस बात का समर्थन किया है कि मनुष्य जीवन अपने आप में अद्भुत एवं महान है। ईश्वर ने पृथ्वी पर 84 लाख योनियां बनाई हैं जिसमें जीवात्मा भटकने के बाद मनुष्य का जन्म पाती है, क्योंकि पेड़-पौधों में 30 लाख, कीड़े-मकोड़ों में 27 लाख, पक्षी में […]
गंगा विशेष पवित्र नदी क्यों? Ganga Nadi Ko Pavitra Kyon Mana Jata Hai
गंगा प्राचीन काल से ही भारतीय जनमानस में अत्यंत पूज्य रही है। इसका धार्मिक महत्त्व जितना है, विश्व में शायद ही किसी नदी का होगा। यह विश्व की एकमात्र नदी है, जिसे श्रद्धा से माता कहकर पुकारा जाता है। महाभारत में कहा गया है- यद्यकार्यशतम् कृत्वाकृतम् गंगाभिषेचनम् । सर्व तत् तस्य गंगाभ्भो दहत्यग्निरिवेन्धनम् ॥ सर्व […]
ग्रहणकाल में भोजन करना वर्जित क्यों?
हमारे ऋषि-मुनियों ने सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने के समय भोजन करने के लिए मना किया है, क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के दौरान खाद्य वस्तुओं, जल आदि में सूक्ष्म जीवाणु एकत्रित होकर दूषित कर देते हैं। इसलिए इनमें कुश डाल दिया जाता है, ताकि कीटाणु कुश में एकत्रित हो जाएं और उन्हें ग्रहण […]
अनिष्ट निवारण के लिए महामृत्युंजय मंत्र को विशेष महत्त्व क्यों?
शास्त्रों एवं पुराणों में असाध्य रोगों से मुक्ति एवं अकाल मृत्यु से बचने के लिए महामृत्युंजय जप करने का विशेष उल्लेख मिलता है। महामृत्युंजय भगवान् शिव को प्रसन्न करने का मंत्र है। इसके प्रभाव से व्यक्ति मौत के मुंह में जाते-जाते बच जाते हैं, मरणासन्न रोगी भी महाकाल शिव की अद्भुत कृपा से जीवन पा […]
पारद शिवलिंग और शालग्राम पूजन का विशेष महत्व क्यों?
पारद शम्भु-बीज है। अर्थात् पारद (पारा) की उत्पत्ति महादेव शंकर के वीर्य से हुई मानी जाती है। इसलिए शास्त्रकारों ने उसे साक्षात् शिव माना है और पारदलिंग का सबसे अधिक महत्त्व बताकर इसे दिव्य बताया है। शुद्ध पारद संस्कार द्वारा बंधन करके जिस देवी-देवता की प्रतिमा बनाई जाती है, वह स्वयं सिद्ध होती है। वागभट्ट […]
