
शुक्रवार व्रत की आरती
आरती लक्ष्मण बालजती की,
असुर संहारन प्राणपति की। आरती…
जगमग ज्योति अवधपुर राजे,
शेषाचल पै आप विराजे। आरती…
घण्टा ताल पखावज बाजे,
कोटि देव मुनि आरती साजे। आरती…
किरीट मुकुट कर धनुष विराजे,
तीन लोक जाकी शोभा राजे। आरती…
कंचन थार कपूर सुहाई,
आरती करत सुमित्रा माई। आरती…
आरती कीजे हरि की तैसी,
ध्रुव प्रह्लाद विभीषण जैसी। आरती…
प्रेम मगन होय आरती गावैं,
बसि वैकुण्ठ बहुरि नहीं आवैं। आरती…
भक्ति हेतु हरि ध्यान लगाचै,
जन घनश्याम परमपद पावै। आरती…
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