बहुत दिन हुए एक सदाचारी और ज्ञानी पुरुष रहता था। उसके तीन पुत्र थे। कहते है, शिकारी का बेटा तीरों के धार चढ़ाता है और दर्जी का बेटा कपड़े काटता है। और विद्धान के पुत्र बचपन से ही अपना सारा समय ज्ञानवर्द्धक पुस्तकें पढ़ने में बिताते थे। उनमें से बड़ा अभी घोड़े पर चढ़ना भी […]
अपना-अपना भाग्य! प्रेरणादायक लोक कहानी
दो भाई थे। बड़ा भाई बुद्धिमान और परिश्रमी था, जब कि छोटा-नसमझ, सुस्त और ईर्ष्यालु था। उसका नाम कादिर था। यह कहानी उसी के बारे में है। क़ादिर अपने भाई के पास आया और अपना दुखड़ा रोने लगा: ”ऐसा क्यों होता है, भैया, कृपा करके ज़रा समझा दो! हम दोनों एक ही वंश और क़बीले […]
रूपवती मीरजान और सांपों का बादशाह! लोक कथा
एक ग़रीब विधवा थी। एसके एक एकलौती बेटी थी। उनके वंश में सबसे रूपवती। उसका नाम मीरज़ान था। एक गरम दिन लड़कियां नदी पर नहाने गयीं और मीरजान को भी अपने साथ ले गयी। पानी में नहाते-नहाते लड़कियां कहने लगी: ”तुम कितनी सुंदर हो, मीरजान! अगर बादशाह तुम्हें देख ले, तो कह उठे: ‘मेरी आंखों […]
सपना, जो सच हो गया! Lok Katha / Folk Tales in Hindi
सरसेम्बाय अनाथ था। न उसका पिता जिंदा रहा था, न ही माता। उसका जीवन दु:ख भरा था। उसने एक ज़मींदार की भेड़ें चराने की नौकरी कर ली। ज़मींदार ने उसे शरद ऋतु में एक लंगड़ी भेड़ देने का प्रलोभन दिया। नन्हा गड़रिया इस पर भी खुश था। वह भेड़ें चराता रहा, ज़मींदार की जूठन खाता […]
खान सुलेमान और बायगीज़ Folk Tales in Hindi with Moral Lok Kathayen
खान सुलेमान के महल यों तो बहुमूल्य वस्तुओं से भरे पड़े थे, पर उसके लिए सोने की एक अंगूठी सबसे ज्यादा मूल्यवान थी, जिसे वह कभी उंगली से नहीं उतारता था। वह अंगूठी जादूई थी: जो भी उस अंगूठी को पहनता, वही पशु-पक्षियों तथा पौधों की भाषा समझने लगता और सारे प्राणी उसके अधीन हो […]
रूपवती अयस्लू! Bharat Ki Lok Kathayen in Hindi
एक गांव में तीन सगे भाई रहते थे। वे इतने बलवान और चतुर थे कि उनके सारे समवयस्क उन पर गर्व करते थे। सारी बालाऐं उन्हें प्रशंसा की दृष्टि से देखती थी, सारे बुजुर्ग उनकी तारीफ करते थे। भाई बचपन से ही एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे। न वे कभी एक दूसरे से […]
अद्भुत बाग! – लोक कथा हिंदी में ( Folk Tale in Hindi )
बहुत पहले दो ग़रीब दोस्त थे- असन और हसेन। असन जमीन के छोटे से टुकड़े पर खेती करता था। हसेन अपना भेड़ों का छोटा सा रेवड़ चराता था। वे इसी तरह रूखा-सूखा खाने लायक कमाकर गुजर-बसर करते थे। दोनों मित्र काफी पहले विधुर हो चुके थे, लेकिन असन की एक रूपवती व स्नेहमयी बेटी थी। […]
मार्ग का साथी! – ब्राह्मण और कैकडा की पंचतंत्र कहानी
नैकाकिना गन्तव्यम् । अकेले यात्रा मत करो। एक दिन ब्रह्मदत्त नाम का एक ब्राह्मण अपने गाँव से प्रस्थान करने लगा। उसकी माता ने कहा:- पुत्र! कोई न कोई साथी रास्ते के लिए खोज ले अकेले यात्रा नहीं करनी चाहिए। ब्रह्मदत्त ने उत्तर दिया:- डरो मत माँ इस मार्ग में कोई उपद्रव नहीं है। मुझे जल्दी […]
मिलकर काम करो! – दो सिर वाले पक्षी की कहानी!
असंहता विनश्यन्ति। परस्पर मिल-जुलकर काम न करने वाले नष्ट हो जाते हैं। एक तालाब में भारण्ड नाम का एक विचित्र पक्षी रहता था। इसके दो मुख थे, किन्तु पेट एक ही था। एक दिन समुद्र के किनारे घूमते हुए उसे एक अमृत समान मधुर फल मिला। यह फल समुद्र की लहरों ने किनारे पर फेंक […]
जिज्ञासु बनो! – चतुर ब्राम्हण और राक्षस की कहानी!
पृच्छकेन सदा भाव्यं पुरुषेण विजानता। मनुष्य को सदा प्रश्नशील, जिज्ञासु रहना चाहिए। एक जंगल में चंडकर्मा नाम का राक्षस रहता था। जंगल में घूमते-घूमते उसके साथ एक दिन एक ब्राह्मण आ गया। वह राक्षस ब्राह्मण के कन्धे पर बैठ गया। ब्राह्मण के प्रश्न पर वह बोला:- ब्राह्मण! मैंने व्रत लिया है। गीले पैरों से मैं […]