प्राचीन मान्यताओं के अनुसार हर हिंदू घर के आंगन में कम-से-कम एक तुलसी का पौधा अवश्य होना चाहिए। कार्तिक मास में तुलसी का पौधा लगाने का बड़ा माहात्म्य माना गया है स्कंदपुराण में लिखा है कि इस मास में जो जितने तुलसी के पौधे लगाता है, वह उतने ही जन्मों के पापों से मुक्त हो […]
वृक्षों की पूजा – उपासना क्यों की जाती है ?
भारतीय संस्कृति में वृक्षों का विशेष महत्त्व है, क्योंकि वे हमारे जीवन के प्राण हैं। पुराणों तथा धर्म-ग्रंथों में पेड़-पौधों को बड़ा पवित्र और देवता के रूप में माना जाता है, इसलिए उनके साथ पारिवारिक संबंध बनाए जाते हैं। जब से वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है, […]
सत्संग और कथा प्रवचन सुनने का महत्त्व क्यों?
Satsang aur katha pravachan sunne se kya hota hai? हमारे देश का पौराणिक और धार्मिक कथा साहित्य बड़ा समृद्धिशाली है। ऋषि-मुनियों ने भारतीय ज्ञान, नीति, सत्य, प्रेम, न्याय, संयम, धर्म तथा उच्चकोटि के नैतिक सिद्धांतों को जनता तक पहुंचाने के लिए बड़े ही मनोवैज्ञानिक ढंग से अनेक प्रकार की धार्मिक कथाओं की रचना की है। […]
करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है ?
स्त्रियों के ऐसे अनेक व्रत और त्योहार होते हैं, जिनमें दिन भर उपवास के बाद रात्रि में जब चंद्रमा उदय हो जाता है, तब अर्घ्य देकर तथा विधिवत् उसकी पूजा करने के उपरांत ही वे अन्न-जल ग्रहण करती हैं। सौभाग्य, पुत्र, धन-धान्य, पति की रक्षा एवं संकट टालने के लिए चंद्रमा की पूजा की जाती […]
सूर्य की उपासना में जल (अर्घ्य) क्यों दिया जाता है?
सूर्योपनिषद् के अनुसार समस्त देव, गंधर्व, ऋषि भी सूर्य रश्मियों में निवास करते हैं। सूर्य की उपासना के बिना किसी का कल्याण संभव नहीं है, भले ही अमरत्व प्राप्त करने वाले देव ही क्यों न हों। स्कंदपुराण में कहा गया है कि सूर्य को अर्घ्य दिए बिना भोजन करना, पाप खाने के समान है। भारतीय […]
शुभ कार्यों में नवग्रहों का पूजन क्यों करते हैं ?
मान्यता यह है कि आकाश में विद्यमान नवग्रह सूर्य, चंद्र, बृहस्पति, शुक्र, केतु, मंगल, बुध, शनि और राहु मिलकर संसार और मनुष्य के संपूर्ण जीवन को नियंत्रित करते हैं। इसीलिए हम जब कोई शुभ कार्य, पूजा-पाठ, अनुष्ठान प्रारंभ करते हैं, तो सबसे पहले नवग्रह यानी नौ ग्रहों का पूजन करते हैं, ताकि उनके दुष्प्रभावों को […]
धार्मिक कर्म में कुश का महत्त्व क्यों ?
धार्मिक अनुष्ठानों में कुश (दर्भ) नामक घास से निर्मित आसन बिछाया जाता है। पूजा-पाठ आदि कर्मकांड करने से व्यक्ति के भीतर जमा आध्यात्मिक शक्ति-पुंज का संचय कहीं लीक होकर अर्थ न हो जाए अर्थात् पृथ्वी में न समा जाए, उसके लिए कुश का आसन विद्युत् कुचालक का कार्य करता है। इस आसन के कारण पार्थिव […]
आचमन तीन बार ही क्यों किया जाता है ?
धर्मग्रंथों में तीन बार आचमन करने के संबंध में कहा गया है- प्रथमं यत् पिवति तेन ऋग्वेदं प्रीणाति । यद् द्वितीयं तेन यजुर्वेदं प्रीणाति, यद् तृतीयं तेन सामवेदं प्रीणाति ॥ अर्थात् तीन बार आचमन करने से तीनों वेद यानी ऋग्वेद, यजुर्वेद व सामवेद प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मनु महाराज के मतानुसार – […]
भगवान् के चरणामृत सेवन का महत्त्व क्यों है ?
मंदिरों में प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती के पश्चात् भगवान् का चरणामृत दिया जाता है। चरणामृत का जल हमेशा तांबे के पात्र में रखने का विधान है, क्योंकि आयुर्वेदिक मतानुसार तांबे में अनेक रोगों को नष्ट करने की शक्ति होती है। इसका जल मेधा, बुद्धि, स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। इसमें तुलसीदल डालने के पीछे […]
देव मूर्ति की परिक्रमा क्यों की जाती है और महत्त्व क्यों है ?
परिक्रमा करना कोरा अंधविश्वास नहीं, बल्कि यह विज्ञान सम्मत है। जिस स्थान या मंदिर में विधि-विधानानुसार प्राण प्रतिष्ठित देवी-देवता की मूर्ति स्थापित की जाती है उस स्थान के मध्य बिंदु से प्रतिमा के कुछ मीटर की दूरी तक उस शक्ति की दिव्य प्रभा रहती है, जो पास में अधिक गहरी और बढ़ती दूरी के हिसाब […]
