शेखू आखिर शेखचिल्ली बन ही गया। मदरसे में जाने पर उसे मालूम हुआ कि वह चार साले का है। मदरसे से उसे पहली तालीम यही हासिल हुई कि यदि कोई उससे उसका परिचय पूछे तो वह बताएगा कि उसका नाम शेखचिल्ली वल्द शेख बदरुद्दीन है। और अगर इसके बाद उससे कोई उसकी उम्र पूछे तो […]
अब न लूँगा कभी कटोरे की तल्ली में तेल! Sheikh Chilli Ki Kahani in Hindi
अजमेर शरीफ की यात्रा के आरम्भ में ही शेखचिल्ली को सच बोलना महँगा पड़ा कि यात्रा का मजा ही जाता रहा। शेख बदरुद्दीन ने भी महसूस किया कि उनके चाँटे ने शेखू की रेल-यात्रा का मजा किरकिरा कर दिया है। उन्होंने यात्रा के दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा कि शेखू को कोई बात […]
तेल का गिलास – Sheikh Chilli Ki Kahani in Hindi Funny Story
शेख चिल्ली इस समय वही कर रहा था, जिसमें उसे सबसे ज्यादा मज़ा आता था – पतंगबाजी। वो इस समय अपने घर की छत पर खड़ा था और आसमान में लाल और हरी पतंगों के उड़ने का मज़ा ले रहा था। शेख की कल्पना भी उड़ान भरने लगी। वो सोचने लगा- काश मैं इतना छोटा […]
जानें शेख चिल्ली के बारे में! Know Who is Sheikh Chilli in Hindi
शेख चिल्ली कौन था? इसका किसी को नहीं पता, पर शेख चिल्लीं की कहानियों ने भारत और पाकिस्ताएन में कई पीढि़यों का मन बहलाया है। शेख चिल्ली को अक्सकर एक बेवकूफ और ऐसे सरल इंसान जैसे दर्शाया जाता है जो किसी भी काम को ठीक से नहीं कर पाता है! वो दिन में सपने देखता […]
यज्ञोपवीत में तीन लड़, नौ तार और 96 चौवे ही क्यों?
यज्ञोपवीत के तीन लड़, सृष्टि के समस्त पहलुओं में व्याप्त त्रिविध धर्मों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं। तैत्तिरीय संहिता 6, 3, 10, 5 के अनुसार तीन लड़ों से तीन ऋणों का बोध होता है। ब्रह्मचर्य से ऋषिऋण, यज्ञ से देवऋण और प्रजापालन से पितृऋण चुकाया जाता है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश यज्ञोपवीतधारी द्विज […]
यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार क्या है और क्यों किया जाता है ?
मनु महाराज का वचन है – मातुरग्रेऽधिजननं द्वितीयं मौञ्जिबन्धनं । – मनुस्मति 2/169 अर्थात् पहला जन्म माता के पेट से होता है और दूसरा यज्ञोपवीत धारण से होता है। माता के गर्भ से जो जन्म होता है, उस पर जन्म-जन्मांतरों के संस्कार हावी रहते हैं। यज्ञोपवीत संस्कार द्वारा बुरे संस्कारों का शमन करके अच्छे संस्कारों […]
गुरु दक्षिणा की परंपरा क्यों? Guru Dakshina Ki Parampara Kyo?
गुरुदीक्षा का प्रतिदान गुरु दक्षिणा कहलाता है। शिष्य गुरु को दक्षिणा देकर अपनी पात्रता, प्रामाणिकता सिद्ध करता है। एक अर्थ में दक्षिणा आहार को पचाने की क्रिया है, और एक अन्य अर्थ में जड़ों का रस पौधे तक पहुंचाकर उसे विकसित एवं फलित करने वाला उपक्रम भी है। आध्यात्मिक दृष्टि से शिक्षा के सार्थक उपयोग […]
गुरु दीक्षा क्या है और गुरु दीक्षा का विशेष महत्त्व क्यों है ?
गुरु की कृपा और शिष्य की श्रद्धा रूपी दो पवित्र धाराओं का संगम ही दीक्षा है। यानी गुरु के आत्मदान और शिष्य के आत्मसमर्पण के मेल से ही दीक्षा संपन्न होती है। दीक्षा के संबंध में गुरुगीता में लिखा है- गुरुमंत्रो मुखे यस्य तस्य सिद्धयन्ति नान्यथा। दीक्षया सर्वकर्माणि सिद्धयन्ति गुरुपुत्रके ॥ – गुरुगीता 2/131 अर्थात् […]
विद्यारंभ संस्कार क्या है और इसका महत्त्व क्यों?
गुरुजनों से वेदों और उपनिषदों का अध्ययन कर तत्त्वज्ञान की प्राप्ति करना ही इस संस्कार का परम प्रयोजन है। जब बालक-बालिका का मस्तिष्क शिक्षा ग्रहण करने योग्य हो जाता है, तब यह संस्कार किया जाता है। आमतौर पर 5 वर्ष का बच्चा इसके लिए उपयुक्त होता है। मंगल के देवता गणेश और कला की देवी […]
कर्णवेध संस्कार (Kanchhedan Sanskar) क्यों किया जाता है?
इस संस्कार को 6 माह से लेकर 16वें माह तक अथवा 3, 5 आदि विषम वर्षों में या कुल की परंपरा के अनुसार उचित आयु में किया जाता है। इसे स्त्री-पुरुषों में पूर्ण स्त्रीत्व एवं पुरुषत्व की प्राप्ति के उद्देश्य से कराया जाता है। मान्यता यह भी है कि सूर्य की किरणें कानों के छिद्र […]
