एक समय की बात है, शैतानगढ़ गांव में श्‍यामलाल नाम का बहुत ही भयानक डाकू रहता था। पूरे गांव वालों के दिमाग में एक बात बैठ गई थी कि इसे मारना तो दूर, नजर उठाकर देखने का साहस भी नहीं कर सकते। एक दिन अचानक सुबह-सुबह सभी गांव वासियों को खबर मिली कि श्‍यामलाल की मृत्‍यु हो गई। सभी गांव के लोग श्‍यामलाल के शव को देख आश्‍चर्यचकित हो गए कि यह कैसे हो सकता है ? बैद्य को बुलाया गया, तब पता चला कि श्‍यामलाल की मृत्‍यु सांप के काटने से हुई है। उसके पूरे शरीर में सांप का जहर फैल गया और उसी के कारण उसका निधन हो गया। उसी समय वहां एक बुजुर्ग ज्‍योतिषी आया और दावा करने लगा कि श्‍यामलाल की मृत्‍यु सांप के काटने से नहीं हुई है। वह ज्‍योतिषी कहने लगा कि मैं कल रात को श्‍यामलाल के साथ था और मेरी आंखों के सामने श्‍यामलाल की मृत्‍यु हुई है तो मैं इस बात को दावे से कह सकता हूँ कि उसे सांप ने नही काटा है।

तब सभी लोग उसे कहते हैं कि ज्‍योतिषी जी, आप हमें सच बताइए श्‍यामलाल की मृत्‍यु कैसे हुई?

ज्‍योतिषी ने कहा, एक महीने पहले श्‍यामलाल मेरे पास आया था क्‍योंकि उसे जानना था कि वह कितने साल तक जीवित रहेगा। तब मैंने मजाक में उसे कहा था कि एक महीने बाद बराबर रात के 12.00 बजे एक जहरीला सांप तुम्‍हें काटेगा और तुम्‍हारी मृत्‍यु हो जाएगी। एक महीने के बाद रात 12.00 बजे अपने आप को उस जहरीले सांप से बचा लिया तो आप मृत्‍यु पर विजय पा लोगे। करीबन महीने भर वह बेचैन रहा। वह हर दिन सांप के बारे में सोचने लगा। हर पल हर क्षण, उस जहरीले सांप के बारे में ही विचार करता था कि मैं उससे कैसे बच सकता हूँ? उस दिन कहां छुप सकता हूँ, जहां सांप मेरे आस-पास भी नहीं मंडराए!

कल रात को जब घड़ी निकट आ गई तो श्‍यामलाल ने मुझे उसके रक्षा के लिए उसके पास रहने का निवेदन किया। और जब 12.00 बजने के लिए 1 मिनट ही बाकी था तो श्‍यामलाल की धड़करन तेज होने लगी। उसने अपने आपको कपड़े में लपेट कर खुद को पूरी तरह से छुपा लिया। उसका एक सेकंड मानो 1 घंटे की तरह जा रहा था।

जैसे ही रात के 12 बजे तो मैंने एक नुकीली सुई उसे चुभा दी, उस समय श्‍यामलाल जोर से चीख उठा, जैसे सच में उसे सांप ने काट लिया हो और वह इसी डर के कारण उसका निधन हुआ।

सीख:- इंसान जिस तरह का विचार रखता है, उसके शरीर की प्रतिक्रिया भी उसी हिसाब से होती है। हर समस्‍या का समाधान है। लोग नकारात्‍मक विचारों के बंधनों में आकर गलत कदम उठा लेते हैं। विचारधारा सकारात्‍मक रखें तो अवश्‍य ही हमारी प्रतिक्रिया सही दिशा में होगी।

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