गुरू नानक देव जी और डाकू की कहानी!

Guru Nanak Dev Ji Aur Daku Ki Kahani

बहुत समय पहले एक डाकू गुरू नानक देव जी के पास आया और चरणों में गिर कर बोला- ”अब डाकू की जिंदगी से मैं बहुत दु:खी हूँ और इसे छोड़ना चाहता हूँ। मुझे सही राह दिखाइये। गुरू नानक देव जी ने कहा कि अगर तुम अच्‍छा इंसान बनना चाहते हो तो चोरी करना व सारे बुरे काम छोड़ दो।

वह पुन: उनके पास आया और बोला- ”नानक जी, चोरी करना व सारे बुरे काम मैं छोड़ नहीं पा रहा हूँ।” गुरू नानक जी ने बहुत सोच-विचार कर उससे कहा- ”दिन भर झूठ बोलने, चोरी करने और खराब काम करने के बाद, तुम बाद में सबके सामने अपने कार्यों का वर्णन करो।”

यह कार्य भी उससे नहीं हो पाया क्योंकि उसे अपने खराब कार्यों को लोगों से बताने में बहुत तकलीफ होती थी। धीरे-धीरे उसे अपने खराब कार्यों से घृणा होने लगी। एक दिन वह दु:खी मन से गुरू नानक देव जी के पास आया और कहा कि मैं जिस काम को आसान समझ रहा था, वह कठिन था। मुझे अपने ऊपर आत्‍मग्‍लानि आती थी। अत: मैंने समस्‍त गलत कार्य छोड़ दिये हैं।


वाहन एवं पत्थर!

एक व्‍यापारी अपनी कार से कहीं तेजी से जा रहा था। वह अपने सोच में वाहन को तेज रफ्तार से चला रहा था। उसे यह भी डर था कि कोई बगल से सड़क पर न आ जाये।

तभी किसी बच्‍चे ने एक पत्थर गाड़ी पर फेंका, जिससे वाहन के एक दरवाजे पर जोर से आवाज हुई और दरवाजे पर निशान बन गया। उसने वाहन तुरंत रोक दिया और उतरकर उसका निरीक्षण करने लगा। वह अत्‍यंत गुस्‍से में था। उसने बच्‍चे को पकड़ लिया और उसको तेज आवाज में डांटने लगा।

बच्‍चा कांपने लगा और आँखों में आंसू भरकर कहा- ”मेरा भाई व्‍हील चेयर से नीचे गिर गया है, उसे मैं स्‍वयं उठा कर व्हील चेयर पर बैठा नहीं सकता हूँ।

उसे काफी चोट भी आयी है। व्‍यापारी ने गुस्‍से का घूँट पी लिया और उसके भाई के घावों को अपने रुमाल से साफ करके व्हील चेयर पर बिठा दिया। बच्‍चा व्‍हील चेयर के साथ अपने घर की तरफ चल दिया।

व्‍यापारी धीरे-धीरे भारी मन से अपनी गाड़ी की तरफ मुड़ा और कुछ सोचता हुआ वाहन पर बैठ गया। व्‍यापारी ने अपने वाहन पर पत्थर के निशान को रहने दिया।

व्‍यापारी अपनी गाड़ी पर हुये गड्ढे के बारे में सोचता रहा कि यह मुझे बार-बार याद दिलायेगा कि जीवन में बहुत तेज रफ्तार से जाने पर किसी को जरूरत पर रोकने के लिए पत्थर फेंकना जरूरी हो सकता है, जिससे हमारा ध्‍यान उसकी ओर आकर्षित हो सके। कुछ पत्थर हल्‍के व मुलायम होते हैं। हमें जीवन में इसकी प्रकार पत्थर मिलते रहते हैं, यह ध्‍यान रखना चाहिए।

Also read this: चंदन का वृक्ष एंव घास और बांस Motivational Story in Hindi

error: Content is protected !!