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Anmol Vachan in Hindi

त्रिलोक सिंह ठकुरेला जी की कुण्डलियां।

लगते ढोल सुहावने, जब बजते हों दूर। चंचल चितवन कामिनी, दूर भली मशहूर।। दूर भली मशहूर, सदा विष भरी कटारी। कभी न रहती ठीक, छली, कपटी की यारी। ‘ठकुरेला’ कविराय, सन्निकट संकट जगते। विषधर, वननृप, आग, दूर से अच्छे लगते।। *** जीना है अपने लिये, पशु को भी यह भान। परहित में मरता रहा, युग…

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