Worry Quotes in Hindi by Munshi Premchand

Worry Quotes in Hindi by Munshi Premchand
Worry Quotes in Hindi by Munshi Premchand

Chinta Ek Kali Deewar Ki Bhanti Charon Oor Se Gher Leti Hai,
Jisme Se Nikalne Ki Phir Koi Gali Nahi Sujhti – by Munshi Premchand

चिंता एक काली दीवर की भांति चारों ओर
से घेर लेती है, जिसमें से निकलने की फिर
कोई गली नहीं सूझती।


जुबाने काट ली गईं, अंग्रेजी खंजर से,
अब कानो में वेदों को कौन घोलेगा…?
नई पीढ़ी के बच्चे गर्वित हैं अंग्रेजी में,
कतराते हैं हिंदी के बोल-चाल और पढ़ने में,
अब संस्कार से संस्कृति का ज्ञान कहां मिलेगा…?
बिन *हिंदी*सभ्यता के बोल कोई , कैसे बोलेगा…?
इस हेतु ये *नंदन* चिंतित है,
अब पता नही भविष्य में,
संस्कृत की “रामायण” कौन खोलेगा….?


यह जो हम लोगों ने भागदौड़ मचा रखी है।
कोई बड़े काम की बात नहीं है।
सब होता है मगर समय पर।
यह जीवन यात्रा लंबी है इसे आराम से तय करें।
हर मुश्किल समय पर खुदा हमारे साथ ही होता है।
उस पर भरोसा रखें।


फिर हिम्मत कर मैंने पूछा
कौन है तू? क्या चाहती है?
वो बोली मैं वो “चिन्ता” हूँ
दिन-रात तुझे जो खाती है…

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