guru ki khusboo prerak prshang

” गुरु की खुशबु ” एक प्रेरक प्रसंग/ फुर्सत के क्षणों में- ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: निजामुद्दीन औलिया एक महान मुस्लिम संत हुए हैं। एक बार एक गरीब आदमी,जिसकी बेटी विवाह योग्य थी, संत औलिया के पास इस उद्देश्य से आया कि कुछ सहायता मिल जायेगी क्योंकि संत बड़े दयालु होते हैं। संतContinue Reading

Anmol Vachan in Hindi

ऐरे-गैरों के साथ भागकर आख़िर क्या मिलता है ? ऐसा करने से तो…. • अपना समाज कमजोर बनता है, • सौभाग्य से मिला हुआ धर्म नष्ट होता है, • मां-बाप और परिवार की आबरू जाती है, • उन्हें रुला कर कोई सुखी नहीं हो पाती है, • संस्कार और संस्कृतिContinue Reading

Anmol Vachan in Hindi

मुफ़्तख़ोरी की पराकाष्ठा! मुफ़्त दवा, मुफ़्त जाँच, लगभग मुफ़्त राशन, मुफ़्त शिक्षा, मुफ्त विवाह, मुफ्त जमीन के पट्टे, मुफ्त मकान बनाने के पैसे, बच्चा पैदा करने पर पैसे, बच्चा पैदा नहीं (नसबंदी) करने पर पैसे, स्कूल में खाना मुफ़्त, मुफ्त जैसी बिजली 200 रुपए महीना, मुफ्त तीर्थ यात्रा, मरने परContinue Reading

Anmol Vachan in Hindi

दो शेरों की दोस्ती बिगड़ जाती है, दोनों ही एक दुसरे के दुश्मन हो जाते हैं, फिर दोनों एक दूसरे से 10 साल तक बात तक नही करते…… एक बार पहले शेर और उसकी बीवी-बच्चों को 25-30 कुत्ते नोचने लगते हैं……. तभी दूसरा शेर आता है, और उन कुत्तों कोContinue Reading

Anmol Vachan in Hindi

अक्सर तुम शाम को घर आ कर पूछते आज क्या क्या किया?? मैं अचकचा जाती सोचने पर भी जवाब न खोज पाती कि मैंने दिन भर क्या किया आखिर वक्त ख़्वाब की तरह कहाँ बीत गया.. और हार कर कहती ‘कुछ नही’ तुम रहस्यमयी ढंग से मुस्कुरा देते!! उस दिनContinue Reading

Anmol Vachan in Hindi

निश्‍चित ही पाप से तो मुक्‍त होना है। मैंने कहा, पाप वह, जो बाहर ले जाये। मैंने कहां पूण्‍य जो भीतर ले जाये। लेकिन बाहर से तो मुक्‍त होना ही है, भीतर से भी मुक्त होना है। पहले बाहर से मुक्त हो लो, तब तत्क्षण तुम पाओगे कि जिसे हमनेContinue Reading

Anmol Vachan in Hindi

ट्रेन पटरी पर अनवरत भाग रही थी, और साथ ही भाग रही थी सुमन की सोच। खिड़की से बाहर देखते हुए याद आ रही थी माँ की। पिछले साल जब वो इसी तरह गर्मी की छुट्टियों मे मायके जा रही थी बच्चो के साथ तो क्या उत्साह और उमंग थी।Continue Reading

Anmol Vachan in Hindi

ससुराल में वो पहली सुबह आज भी याद है। कितना हड़बड़ा के उठी थी, ये सोचते हुए कि देर हो गयी है और सब ना जाने क्या सोचेंगे ? एक रात ही तो नए घर में काटी है और इतना बदलाव, जैसे आकाश में उड़ती चिड़िया को, किसी ने सोनेContinue Reading

Anmol Vachan in Hindi

इन्सान जैसा कर्म करता है कुदरत या परमात्मा उसे वैसा ही उसे लौटा देता है। एक बार द्रोपदी सुबह तडके स्नान करने यमुना घाट पर गयी। भोर का समय था तभी उसका ध्यान सहज ही एक साधु की ओर गया जिसके शरीर पर मात्र एक लँगोटी थी। साधु स्नान केContinue Reading

Anmol Vachan in Hindi

एक शाम माँ ने दिनभर की लम्बी थकान एवं काम के बाद जब रात का खाना बनाया तो उन्होंने पापा के सामने एक प्लेट सब्जी और एक जली हुई रोटी परोसी। मुझे लग रहा था कि इस जली हुई रोटी पर कोई कुछ कहेगा। परन्तु पापा ने उस रोटी कोContinue Reading