हर उस बेटे को समर्पित जो घर से दूर है!!

Ladkon Par Kavita Thoughts in Hindi
Bete Bhi Ghar Chor Ke Jate Hain

“हर उस बेटे को समर्पित जो घर से दूर है”
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
जो तकिये के बिना कहीं… भी सोने से कतराते थे…
आकर कोई देखे तो वो… कहीं भी अब सो जाते हैं…
खाने में सो नखरे वाले… अब कुछ भी खा लेते हैं…
अपने रूम में किसी को… भी नहीं आने देने वाले…
अब एक बिस्तर पर सबके… साथ एडजस्ट हो जाते हैं!!

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
घर को मिस करते हैं लेकिन… कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले… अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
पैसे कमाने की जरूरत में… वो घर से अजनबी बन जाते हैं!!

लड़के भी घर छोड़ जाते हैं!!
बना बनाया खाने वाले अब वो खाना खुद बनाते है,
माँ-बहन-बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है।
कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं।

लड़के भी घर छोड़ जाते है!!
मोहल्ले की गलियां, जाने-पहचाने रास्ते,
जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते,
माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं
तन्हाई में करके याद, लड़के भी आँसू बहाते है

लड़के भी घर छोड़ जाते हैं!!
नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे बहिन- भाई,
छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई ,
सब छुड़ा देती है साहब, ये रोटी और कमाई।
मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,
बेटियाँ ही नही साहब, बेटे घर छोड़ जाते हैं!!

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9 thoughts on “हर उस बेटे को समर्पित जो घर से दूर है!!

  1. सही कहा भाई बिल्कुल यही हाल है मेरा भी

  2. Really nice story ,, ajkal sabhi bete apne ghar se dur rhte h study or job ke liye , vese hi mai bhi Apne ghar se 150 km. Dur betha hu,, Dil ko chhu gyi ye poem

  3. मेरा भी यही हाल हैं प्रदेश में ये कविता हमें काफी कुछ सिखाती है।
    मैं ये मानता हूँ जो बेटे घर से दूर रहते हैं उनके जैसा सुपर हीरो और उनके जैसा अनुभवी कोई नही है।
    ऐसे बेटे पर मुझे गर्व है।
    पर याद रखना दोस्तो,
    पैसा कमाना कोई बड़ी बात नही। अपनो के साथ रोटी खाना बहुत बड़ी बात है॥

  4. मेरे दो बेटे हैं और दोनो ही दूर हैं, आपने झकझोर कर रख दिया, आँखों में आँसू आ गये. दो बार पढ़ा फिर नहीं पढ़ पाया, कवि की सोच को प्रणाम. Kolkata

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