स्त्री हूँ न….

Mein Stree Hun Kavita Quotes in Hindi
Mein Stree Hun Kavita Quotes in Hindi

चट्टान_सी
सुदृढ दिखती हूँ..
हमेशा-
मुस्कुराहट रहती है_
चेहरे पर…
पर_
मैं_भी टूटती हूँ..
बिखरती हूँ.,
मोम की तरह_
पिघल भी जाती हूँ..
काश!
इस बात को_
तुम समझते ..!

इसख़्याल से
नम हुए पलकों को…
अपने_हीं
आँचल_से पोंछ
फिर
मुस्कुरा लेती हूँ_

स्त्री हूँ न,,,,,

🎉💕

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2 thoughts on “स्त्री हूँ न….

  1. स्त्री कोई खिलौना नहीं जिसे खेलकर कर तोड़ दिया जाये
    बहुत ही रमणीक कविता है यह स्त्री हूँ न।

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