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  • Anmol Vachan - जाे सोच बदल दे!
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    • Anmol Vachan
मोहन अभी आठवीं क्लास में पढ़ाई करता था ,
वह पढ़ने में अपने क्लास में बहुत ही अच्छा था।
 उसके पिता जी एक दर्जी थे जो लोगो के कपड़े सीलते थे
और उससे जो पैसे मिलते थे वो मोहन की हर जरुरत पूरी करने की कोसिस करते थे |

मोहन भी अपने माता – पिता की बहुत ही रेस्पेक्ट करता था और उनकी हर बात को मानता था |
मोहन के स्कूल में बहुत ऐसे लड़के थे जिनके पास बहुत सारे खेलने और खाने के सामान होते थे ,
लेकिन मोहन कभी भी उनकी तुलना नहीं करता था |
उसको जो भी मिल जाता था उसमे ही वह खुश रहता था |
दीवाली का टाइम था स्कूल की कुछ दिनों की छुट्टिया हो गयी थी |
मोहन अब हर रोज अपने पापा के साथ उनके दूकान पर जाता था ,
वह अपने पापा के काम करने के तरीके को बहुत ध्यान से देखता रहता था |
एक दिन वह अपने पापा को काम करते देख रहा था – उसके पापा कैंची को नीचे और सुई को अपने सर पर रखते थे |
 यह काम वह बहुत देर से देख रहा था जो उससे रहा नहीं गया तो उसने अपने पापा से पूछ ही लिया |
मोहन ने बोले – पापा आप कैंची को नीचे और सुई को ऊपर क्यों रख रहे हो , जबकि कैंची आप का कपडा काटती है |
Anmol Vachan - जाे सोच बदल दे!